शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के प्रशासन ने एक बार फिर अपने तानाशाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से छात्र-छात्राओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का काम किया है। परास्नातक कानून (LL.M. प्रथम सेमेस्टर) में प्रवेश लेने की आस लगाए बैठे विद्यार्थियों के साथ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एक भद्दा मजाक किया है। पहले बकायदा अधिसूचना जारी कर पंजीयन कराया गया, कॉलेज ने मेरिट लिस्ट भी जारी कर दी, और ठीक उसी दिन जब छात्रों को कॉलेज जाकर फीस जमा कर एडमिशन लेना था, विश्वविद्यालय ने एक नया फरमान जारी कर पूरी प्रक्रिया को ही अधर में लटका दिया।

छात्रों के हित में आवाज़ उठाना हमारा परम कर्तव्य है, और हम विश्वविद्यालय के इस ढुलमुल रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।
क्या है पूरा मामला? (तारीखों की जुबानी प्रबंधन की नाकामी)
विश्वविद्यालय द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया को लेकर जो खेल खेला गया है, उसकी क्रोनोलॉजी इस प्रकार है:

- 24 जून 2026 (अधिसूचना क्रमांक 157): विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एल.एल.एम. प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश हेतु आधिकारिक समय-सारिणी जारी की थी।
- 25 जून से 10 जुलाई 2026: इस अवधि के दौरान छात्रों से ऑनलाइन पोर्टल पर प्रवेश हेतु सफलतापूर्वक पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) कराया गया।
- 13 जुलाई 2026: निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार महाविद्यालयों द्वारा नियमानुसार मेरिट सूची जारी की जानी थी। इसी के अनुपालन में स्वामी बालकृष्ण पुरी लॉ कॉलेज, रायगढ़ ने बकायदा अपने डैशबोर्ड और नोटिस बोर्ड पर ST, SC, OBC और General कैटेगरियों की बकायदा प्रोविजनल मेरिट सूची (Tentative Merit List) भी जारी कर दी
- 14 जुलाई 2026 (सुबह 11:00 बजे): यह वह समय था जब मेरिट सूची में आए छात्रों को संबंधित महाविद्यालय में जाकर अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराकर शुल्क भुगतान करना था और अपना एडमिशन पक्का करना था।
ऐन वक्त पर यू-टर्न: 14 जुलाई को जारी हुआ ‘तुगलकी फरमान’

जब छात्र प्रवेश लेने की तैयारी में थे, ठीक उसी दिन 14 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने एक नई अधिसूचना (क्रमांक 205/अका./2026-27) चस्पा कर दी। इस नई अधिसूचना में माननीय कुलपति महोदय के अनुमोदन का हवाला देते हुए कहा गया कि:
“विधि पाठ्यक्रमों (एल.एल.एम.) प्रथम सेमेस्टर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आगामी आदेश/अधिसूचना तक पंजीयन की प्रक्रिया जारी रहेगी एवं मेरिट सूची जारी करने की समय सारिणी पृथक से जारी की जावेगी।”
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले से यह साफ झलकता है कि उन्हें विद्यार्थियों के समय, पैसे और मानसिक तनाव की कोई परवाह नहीं है। हमारे सीधे और कड़े सवाल विश्वविद्यालय प्रबंधन से हैं:
- पंजीयन खत्म होने और मेरिट सूची जारी होने के बाद दोबारा पोर्टल खोलने का क्या औचित्य है? जब स्वामी बालकृष्ण पुरी लॉ कॉलेज जैसे संबद्ध महाविद्यालयों ने नियमानुसार अपनी चयन सूची (General, OBC, SC, ST) तैयार कर ली थी, तो ऐन वक्त पर एडमिशन रोकने के पीछे क्या मंशा है?
- क्या यह योग्य छात्रों के हक पर डाका डालने की कोशिश है? जिन छात्रों ने समय पर फॉर्म भरा, जिनका नाम मेरिट सूची में आ चुका है, वे अब क्यों इंतजार करें? क्या किसी विशेष वर्ग या व्यक्तियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है?
- अकादमिक कैलेंडर का मज़ाक क्यों? उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों का हवाला देकर कैलेंडर जारी किया जाता है, लेकिन अपनी मर्जी से जब चाहे नियमों को बदल दिया जाता है। इस लेती-लतीफी से छात्रों का सत्र पिछड़ने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
छात्र हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगा। हमारी मांग है कि जिन विद्यार्थियों का नाम स्वामी बालकृष्ण पुरी लॉ कॉलेज रायगढ़ की मेरिट सूची में आ चुका है, उनकी प्रवेश प्रक्रिया को बिना किसी देरी के तुरंत बहाल किया जाए। नए पंजीयन के नाम पर पुरानी मेरिट लिस्ट को प्रभावित करना बंद किया जाए।
यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना बंद नहीं किया, तो छात्र संगठनों और उग्र जन-आंदोलन के लिए स्वयं कुलपति और कुलसचिव जिम्मेदार होंगे।




