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कैमरे में कैद: सारंगढ़ में नोट गिनते दिखे वनपाल बाबू! वीडियो वायरल होते ही वन विभाग में मचा हड़कंप

सारंगढ़-बिलाईगढ़: क्या खाकी और रसूख के दम पर भ्रष्टाचार का यह खेल खुलेआम चल रहा था? सारंगढ़-बिलाईगढ़ वनमंडल से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां उड़नदस्ता मुख्यालय में पदस्थ एक वनपाल (फॉरेस्टर) का अज्ञात व्यक्ति से सरेआम नोट लेते और फिर बड़े इत्मीनान से उन्हें गिनकर जेब में रखते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।

इस वीडियो के सामने आते ही वन विभाग के आला अधिकारियों के हाथ-पॉंव फूल गए हैं। आरोपी वनपाल का नाम मृगेन्द्र निराला बताया जा रहा है, जो उड़नदस्ता दल में सहायक के पद पर तैनात हैं।

स्टिंग ऑपरेशन: पत्रकार ने खोला भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा

यह पूरा मामला तब खुला जब सजग पत्रकार श्री दिनेश जोल्हे ने एक स्टिंग जैसे वीडियो के साथ उड़नदस्ता दल प्रभारी के दफ्तर में दस्तक दी।

  • तारीख: 30 अप्रैल 2026
  • वक्त: सुबह करीब 11:30 बजे
  • सबूत: वीडियो में वनपाल मृगेन्द्र निराला साफ तौर पर एक अज्ञात शख्स से नगद राशि (रिश्वत) वसूलते और जेब में डालते नजर आ रहे हैं।

यह पूरा मामला तब खुला जब सजग पत्रकार श्री दिनेश जोल्हे ने एक स्टिंग जैसे वीडियो के साथ उड़नदस्ता दल प्रभारी के दफ्तर में दस्तक दी।

उड़नदस्ता दल से हटाने की मांग, DFO को लिखा पत्र

वीडियो सामने आने के बाद उड़नदस्ता प्रभारी ने भी अपनी साख बचाने के लिए तुरंत एक्शन लिया है। 4 मई 2026 को वनमण्डलाधिकारी (DFO) को एक सीक्रेट लेटर भेजा गया है, जिसमें मांग की गई है कि:

​”आरोपी वनपाल मृगेन्द्र निराला को तत्काल प्रभाव से उड़नदस्ता दल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए और उनका तबादला कहीं दूर किया जाए, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।”

SDO को सौंपी गई जांच: क्या नपेंगे भ्रष्ट बाबू?

मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने अब आधिकारिक तौर पर जांच के आदेश दे दिए हैं। पत्र क्रमांक/जा./23 के तहत इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की जिम्मेदारी उपवनमंडलाधिकारी (SDO), उपवनमंडल सारंगढ़ को सौंपी गई है।

​आदेश में साफ निर्देश हैं कि पत्रकार द्वारा सौंपे गए वीडियो और उड़नदस्ता प्रभारी के तथ्यों की बारीकी से जांच कर जांच प्रतिवेदन (Report) यथाशीघ्र जमा किया जाए।

हमारे खबर नवीस का सवाल: क्या सिर्फ ट्रांसफर ही सजा है?

इस खुलासे के बाद से स्थानीय वन अमले और भ्रष्ट कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता होगी या इस ‘नोट गिनने वाले’ वनपाल पर कोई ऐसी दंडात्मक कार्रवाई होगी जो दूसरों के लिए नजीर बने? ‘खबर नवीस’ की नजर इस जांच की हर एक फाइल पर टिकी हुई है।

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