बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस कॉन्स्टेबलों के प्रमोशन (आरक्षक से प्रधान आरक्षक) की आस लगाए बैठे जवानों को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने प्रमोशन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतिम पदोन्नति आदेश जारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी है।
अदालत ने साफ किया है कि विभागीय स्तर पर कागजी प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी जवान को ‘प्रमोशन लेटर’ नहीं थमाया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब समर वेकेशन के बाद 15 जून 2026 से शुरू होने वाले हफ्ते में होगी।
क्यों रुक गया 795 जवानों का प्रमोशन? समझिए पूरा विवाद
यह पूरा मामला तब गरमाया जब बिलासपुर संभाग में आरक्षकों से प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति की कवायद शुरू हुई। आईजी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे संभाग में 795 आरक्षक प्रमोशन की रेस में हैं:
- बिलासपुर: 230 | रायगढ़: 230
- कोरबा: 85 | जांजगीर-चांपा: 60
- सारंगढ़-बिलाईगढ़: 60 | सक्ती: 50
- मुंगेली: 40 | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: 40
कोरबा जिले में करीब 85 आरक्षक प्रमोशन के दायरे में आए थे। विभाग ने जो लिस्ट जारी की, उसमें उन आरक्षकों को सीनियरिटी (वरिष्ठता) में सबसे ऊपर रख दिया गया, जो दूसरे जिलों से ट्रांसफर होकर कोरबा आए हैं। नतीजा यह हुआ कि कोरबा में सालों से मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे स्थानीय जवानों का नाम लिस्ट में या तो नीचे खिसक गया या गायब हो गया।
73 पुलिसकर्मियों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
विभाग के इस ‘सीनियरिटी गेम’ के खिलाफ कोरबा में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 पुलिसकर्मियों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इस याचिका में राज्य सरकार, गृह सचिव, डीजीपी, बिलासपुर आईजी और कोरबा एसपी को पार्टी (पक्षकार) बनाया गया है।
कोर्ट में वकीलों की दलीलें:
- याचिकाकर्ताओं के वकील: “विभाग 1 जून 2026 को फाइनल मेरिट लिस्ट जारी करने की तैयारी में है। अगर कोर्ट ने अभी अंतरिम रोक नहीं लगाई, तो इन स्थानीय जवानों के साथ नाइंसाफी हो जाएगी और याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”
- सरकारी वकील: “पुलिस हेडक्वार्टर (PHQ) द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को इस रिट याचिका में सीधे चुनौती नहीं दी गई है, इसलिए यह याचिका तकनीकी रूप से सही नहीं है।”
विभाग के इस ‘सीनियरिटी गेम’ के खिलाफ कोरबा में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 पुलिसकर्मियों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इस याचिका में राज्य सरकार, गृह सचिव, डीजीपी, बिलासपुर आईजी और कोरबा एसपी को पार्टी (पक्षकार) बनाया गया है।
कोर्ट में वकीलों की दलीलें:
- याचिकाकर्ताओं के वकील: “विभाग 1 जून 2026 को फाइनल मेरिट लिस्ट जारी करने की तैयारी में है। अगर कोर्ट ने अभी अंतरिम रोक नहीं लगाई, तो इन स्थानीय जवानों के साथ नाइंसाफी हो जाएगी और याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”
- सरकारी वकील: “पुलिस हेडक्वार्टर (PHQ) द्वारा जारी स्पष्टीकरण पत्र को इस रिट याचिका में सीधे चुनौती नहीं दी गई है, इसलिए यह याचिका तकनीकी रूप से सही नहीं है।”
जस्टिस पी.पी. साहू की बेंच ने दिया अंतरिम फैसला
जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीच का रास्ता निकाला। कोर्ट ने जवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत दी है। अब 1 जून को फाइनल लिस्ट भले आ जाए, लेकिन जब तक 15 जून के बाद कोर्ट का अगला आदेश नहीं आता, तब तक छत्तीसगढ़ पुलिस में प्रमोशन के फीते नहीं बंधेंगे।


