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छत्तीसगढ़ RI प्रमोशन विवाद: सुप्रीम कोर्ट से भी याचिका खारिज, नई परीक्षा का रास्ता साफ; सफल अभ्यर्थियों को तीसरा बड़ा झटका

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति परीक्षा को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी गतिरोध अब अपने अंतिम मुकाम पर पहुंच गया है। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने इस मामले से जुड़ी विशेष अनुमति याचिका (SLP) को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद राज्य में नए सिरे से RI प्रमोशन परीक्षा आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं दूसरी ओर, पुरानी परीक्षा में सफल रहे अभ्यर्थियों को लगातार तीसरा बड़ा न्यायिक झटका लगा है, जिससे उनकी नियुक्ति और पदोन्नति की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया है।

मामले के मुख्य बिंदु (At a Glance)

  • सर्वोच्च अदालत की मुहर: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के परीक्षा निरस्त करने संबंधी आदेश को अंतिम रूप से बरकरार रखा है।
  • हस्तक्षेप से इनकार: जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वे हाईकोर्ट के फैसले में दखल नहीं देना चाहते।
  • त्रिकोणीय कानूनी मार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी है।
  • आगे का रास्ता: राज्य सरकार अब राजस्व निरीक्षक के पदों के लिए नए सिरे से पारदर्शी परीक्षा आयोजित करने के लिए स्वतंत्र है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? ‘हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं’

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट के 2 जनवरी 2026 और 10 अप्रैल 2026 के अंतिम निर्णय व आदेश को चुनौती देते हुए धनंजय सिंह व अन्य अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की डिवीजन बेंच में इस मामले की अहम सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड और पूर्व में दिए गए आदेशों का गहन अवलोकन किया। याचिकाकर्ताओं को उम्मीद थी कि शीर्ष अदालत से उन्हें कोई अंतरिम राहत मिल सकती है, लेकिन खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के विवेकपूर्ण निर्णय में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, अदालत ने अपील दायर करने में हुई देरी को तकनीकी रूप से माफ कर दिया, लेकिन मेरिट के आधार पर याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक: सफल अभ्यर्थियों का सफर

यह पूरा विवाद छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और न्यायिक गलियारों में लंबे समय से गूंज रहा है। सफल अभ्यर्थियों के लिए कानूनी राहत के सारे रास्ते एक-एक कर बंद हो गए:

  1. सिंगल बेंच का झटका: परीक्षा प्रक्रिया में विसंगतियों को देखते हुए हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सबसे पहले इस परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया था।
  2. डिवीजन बेंच से भी निराशा: सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ जब अभ्यर्थी डिवीजन बेंच पहुंचे, तो वहां भी लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट का पुराना फैसला ही बरकरार रहा।
  3. सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय: अंतिम आस के रूप में अभ्यर्थियों ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर विभाग में नई व्यवस्था का रास्ता खोल दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले के बाद अब इस पूरे विवाद पर विराम लग गया है। अब गेंद पूरी तरह से राज्य सरकार और राजस्व विभाग के पाले में है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही रिक्त पदों और पदोन्नति के नियमों की समीक्षा कर नई RI प्रमोशन परीक्षा के लिए नए सिरे से अधिसूचना जारी कर सकती है।

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