रायगढ़। जिले के गेरवानी-सरायपाली मार्ग पर स्थित औद्योगिक संयंत्र (Plants) अब मजदूरों के लिए ‘ब्लैक होल’ बनते जा रहे हैं, जहां हादसे तो होते हैं, लेकिन उनकी खबर फैक्ट्रियों की ऊंची चारदीवारी से बाहर नहीं आ पाती। पिछले एक हफ्ते के भीतर इस इलाके के दो बड़े स्पंज आयरन और पाइप मिल प्लांटों से जुड़ी दो बेहद खौफनाक दुर्घटनाओं की पुख्ता जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। हैरानी की बात यह है कि इंडक्शन फर्नेस और क्रेन से हुए इन गंभीर हादसों में कई मजदूरों के घायल होने के बावजूद न तो पुलिस के पास कोई सूचना है और न ही सरकारी मेडिकल रिकॉर्ड में कुछ दर्ज है। इस पूरी ‘कवर-अप’ (Cover-up) थ्योरी के पीछे प्लांट प्रबंधन की भौगोलिक स्थिति (Geographical Location) और शहर के कुछ ‘चर्चित’ व ‘संदिग्ध’ प्राइवेट अस्पतालों का एक बड़ा गठजोड़ काम कर रहा है।
- गेरवानी-सरायपाली रोड पर स्थित दो बड़े स्पंज आयरन व रोलिंग मिल प्लांटों में एक हफ्ते के भीतर हुए दो औद्योगिक हादसे
- पहली घटना: रात 2 से 3 बजे के बीच इंडक्शन फर्नेस में हुआ हादसा, 4 से 6 मजदूरों के गंभीर रूप से झुलसने/घायल होने की खबर
- दूसरी घटना: दो दिन बाद एक प्लांट की पाइप मिल में क्रेन हादसा, सिर फटने से एक कर्मचारी गंभीर, रायपुर किया गया रेफर
- जियोग्राफिकल आइसोलेशन: घनी आबादी से मीलों दूर ‘आउटर’ में होने का पूरा फायदा उठा रहा प्रबंधन
- ’MLC’ नियमों का खुला उल्लंघन: शहर के 2-3 ‘संदिग्ध’ प्राइवेट अस्पतालों में पुलिस को बिना बताए किया जा रहा है घायलों का गुपचुप इलाज
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पहली घटना 4- 5 मई की रात लगभग गेरवानी-सरायपाली रोड इलाके के एक बड़े प्लांट में रात 2 से 3 बजे के बीच हुई। बताया जा रहा है कि इंडक्शन फर्नेस (Induction Furnace) में अचानक कुछ तकनीकी खराबी या ब्लास्ट जैसी स्थिति बनी, जिसकी चपेट में आकर नाइट शिफ्ट में काम कर रहे 4 से 6 मजदूर बुरी तरह जख्मी हो गए।
इस हादसे की स्याही सूखी भी नहीं थी कि 7 मई की शाम 4 -5 बजे के करीब, इसी इलाके के दूसरे नामी प्लांट की रोलिंग मिल (Rolling Mill) में एक और बड़ा हादसा हो गया। सूत्रों की मानें तो काम के दौरान क्रेन का एक भारी-भरकम हुक टूटकर सीधे एक कर्मचारी के सिर पर आ गिरा। उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसे आनन-फानन में रायगढ़ से सीधे रायपुर के एक बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
हादसे पुलिस और मीडिया की नजरों से कैसे बच गए? इसका सबसे बड़ा और तार्किक जवाब इन प्लांटों की लोकेशन में छिपा है। अगर सरकारी खसरा रिकॉर्ड और गूगल मैप्स का जियोग्राफिकल सर्वे किया जाए, तो साफ हो जाता है कि गेरवानी और सरायपाली रोड का यह पूरा इंडस्ट्रियल बेल्ट शहर और घनी आबादी से पूरी तरह कटा हुआ है।
वहां कोई रिहायशी बस्ती नहीं है, चारों तरफ सिर्फ प्लांट की चिमनियाँ, खाली जमीनें और मजदूरों के क्वार्टर हैं। रात 2-3 बजे प्लांट के भीतर क्या ब्लास्ट होता है और कितनी एम्बुलेंस गुपचुप तरीके से निकलकर शहर की ओर जाती हैं, इसकी भनक आम जनता तक पहुंचना नामुमकिन है। वहां मौजूद लोग खुद प्लांट के कर्मचारी या मजदूर होते हैं, जो नौकरी जाने के डर से हमेशा मुंह बंद रखने को मजबूर हैं। प्रबंधन इसी ‘भौगोलिक एकांत’ का फायदा उठाकर हादसों को दफन कर रहा है।
इस पूरे खेल का सबसे खौफनाक पहलू है रायगढ़ शहर के कुछ चर्चित और ‘संदिग्ध’ प्राइवेट अस्पताल, जिन्होंने ‘औद्योगिक हादसों’ के इलाज की मानो फ्रेंचाइजी ले रखी है।
कानून (Medico-Legal Case – MLC) के अनुसार, दुर्घटना या हादसे के किसी भी केस में अस्पताल प्रबंधन को तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना देनी होती है। लेकिन सूत्रों का स्पष्ट दावा है कि इन ‘संदिग्ध’ अस्पतालों में प्लांट से आने वाले घायलों का इलाज बेहद ‘गुपचुप’ और सिस्टेमेटिक तरीके से किया जाता है। पुलिस को जानबूझकर अंधेरे में रखा जाता है और सारे मेडिकल रिकॉर्ड ऐसे मिटा दिए जाते हैं कि किसी को भनक तक न लगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले के औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (Industrial Safety Department) और स्वास्थ्य महकमे के ऑडिट व मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘मेडिको-लीगल केस’ (MLC) के नियमों की अनदेखी करना या दबाव में सबूत मिटाना एक गंभीर कानूनी अपराध है।


