21वीं सदी के भारत में जब हम विज्ञान और तकनीकी की ऊंची उड़ान भर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार से आई एक खबर ने मानवता और कानून व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। कथित ‘गुप्त खजाने’ को हासिल करने की सनक में एक शख्स इस कदर अंधा हुआ कि उसने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 21 लोगों की नरबलि की खौफनाक साजिश रच डाली। इस वीभत्स योजना के तहत पिछले चार महीनों में 8 मासूम ग्रामीणों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
महानदी के शांत आंचल में बसा ‘पुराना खर्वे’ गांव आज खौफ के साए में है। आइए, ‘खबर नवीस’ की इस विशेष रिपोर्ट में जानते हैं इस पूरी वारदात की एक-एक परत।
मामले का पूरा विवरण (In-Depth Details)
1. दहशत का केंद्र: पुराना खर्वे गांव
- भौगोलिक स्थिति: यह घटना बलौदाबाजार जिले के ‘पुराना खर्वे’ गांव की है, जो महानदी के किनारे बसा है।
- आबादी और आजीविका: करीब 800 की आबादी वाला यह एक बेहद शांत गांव है, जहां के लोग मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं।
- मौजूदा स्थिति: इस घटना के बाद से गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोगों के मन में डर इस कदर हावी है कि पड़ोसी भी एक-दूसरे को शक की निगाह से देख रहे हैं।
2. मुख्य आरोपी और साजिश का तरीका
आरोपों के केंद्र में गांव का ही एक किराना दुकानदार रामसाय जायसवाल है। गांव में कुल तीन किराना दुकानें हैं, जिनमें से एक रामसाय की है।
- कथित मकसद: आरोपी कथित तौर पर किसी छिपे हुए रहस्यमयी खजाने (गुप्त धन) को पाना चाहता था। तांत्रिक क्रिया या अंधविश्वास के चलते उसने 21 लोगों की बलि देने का लक्ष्य रखा था।
- ‘स्लो पॉइजन’ का हथकंडा: आरोपी पर आरोप है कि उसने ग्रामीणों को निशाना बनाने के लिए शराब में सुहागा (बोरेक्स) मिलाकर पिलाया। पिछले 4 महीनों में उसने 9 लोगों को यह जानलेवा मिश्रण दिया, जिनमें से 8 की मौत हो चुकी है।
3. मौत का ’15 मिनट’ का चक्रव्यूह
ग्रामीणों और चश्मदीदों के अनुसार, जिन भी लोगों ने आरोपी की दुकान या उसके द्वारा दी गई शराब पी, उनकी मौत महज 15 मिनट के भीतर हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि मरने वाले सभी लोग पूरी तरह स्वस्थ थे और उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। शुरुआत में इन्हें सामान्य मौतें माना जा रहा था, लेकिन जब संख्या 8 तक पहुंच गई, तो ग्रामीणों का माथा ठनका।
4. मौत के मुंह से लौटे चश्मदीद की गवाही
इस पूरे मामले का सबसे अहम मोड़ 14 मई को आया। घटना के मुख्य किरदार और एकमात्र जीवित बचे गवाह कार्तिक प्रजापति ने जो आपबीती बताई, उसने इस खौफनाक साजिश से पर्दा उठा दिया:
”14 मई को दुकानदार रामसाय ने शराब की एक बोतल से आधी शराब अलग निकाली और बची हुई शराब मुझे दे दी। मैंने जैसे ही उसके दो घूंट पिए, मुझे तेज उल्टियां होने लगीं। मेरा सिर चकराया और मैं वहीं बेहोश हो गया। खुशकिस्मत था कि घरवाले तुरंत अस्पताल ले गए, जहां 8 घंटे बाद मुझे होश आया।”
पुलिसिया कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह मुस्तैद हो चुका है।
- शवों को निकाला गया: सच का पता लगाने के लिए अब तक 7 शवों को कब्र से (जमीन से) खोदकर बाहर निकाला जा चुका है।
- फॉरेंसिक जांच: इन शवों के अवशेषों को पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक लैब (FSL) परीक्षण के लिए भेजा गया है, ताकि रासायनिक जहर (सुहागा) की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि हो सके।
- जांच जारी: हालांकि पुलिस ने अभी तक इस मामले में नरबलि के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट आते ही इस केस की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।




