प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस क्रांतिकारी फैसले पर मुहर लगी। आइए सरल शब्दों में समझते हैं कि यह पूरी व्यवस्था क्या है और इससे क्या बदलाव आएंगे:
1. कर्मचारियों को राहत: हफ्ते में 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’
भीषण गर्मी और ग्रीष्मकालीन अवकाश को देखते हुए कोर्ट के कर्मचारियों के लिए कामकाजी नियमों को लचीला बनाया गया है:
- रोस्टर सिस्टम: न्यायिक अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को सप्ताह में अधिकतम दो दिन घर से काम करने की अनुमति दे सकेंगे।
- 50% उपस्थिति अनिवार्य: अदालत का काम प्रभावित न हो, इसलिए हर वर्किंग डे पर दफ्तर में कम से कम 50% स्टाफ की मौजूदगी जरूरी रहेगी।
- ‘ऑन कॉल’ रहना होगा: घर से काम कर रहे कर्मचारियों को अदालती समय पर एक्टिव रहना होगा। अगर कोई जरूरी काम आता है, तो उन्हें तुरंत फोन पर उपलब्ध होना होगा और जरूरत पड़ने पर कोर्ट पहुंचना होगा।
2. जजों के लिए ‘वाहन पूलिंग’: ईंधन और पर्यावरण की बचत
सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि न्यायधीशों ने भी इस मुहिम में अपनी जिम्मेदारी निभाई है:
- रिसोर्स मैनेजमेंट: ईंधन की बचत और सरकारी संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए सभी न्यायिक अधिकारियों को ‘वाहन पूलिंग’ (गाड़ी शेयर करने) के निर्देश दिए गए हैं।
- सहमति: सभी न्यायिक अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और सामूहिक रूप से इसका कड़ाई से पालन करने की सहमति दी है।



