कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से एक बड़ी और सामाजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचल में एक बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण के तहत 150 लोगों ने अपनी स्वेच्छा से सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ की है। इस पूरे गरिमामयी कार्यक्रम का नेतृत्व क्षेत्रीय विधायक भावना बोहरा ने किया।
इस आयोजन की सबसे भावुक और चर्चा में रहने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब विधायक भावना बोहरा ने खुद अपने हाथों से सनातन धर्म में लौटने वाले परिवारों के पैर पखारकर (पैर धोकर) उनका स्वागत किया और उन्हें मुख्यधारा में शामिल कराया।
मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी परिवार पूर्व में किन्हीं कारणों या प्रलोभनों वश अन्य धर्मों में चले गए थे। लेकिन अपनी जड़ों और पूर्वजों की संस्कृति की ओर लौटने की तीव्र इच्छा के कारण उन्होंने घर वापसी का फैसला किया।
- वैदिक रीति-रिवाज: कार्यक्रम का आयोजन पूर्णतः वैदिक पद्धति से किया गया।
- शुद्धिकरण अनुष्ठान: योग्य पंडितों के सानिध्य में मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और गंगाजल छिड़ककर सभी का शुद्धिकरण कराया गया।
- सम्मान: विधायक भावना बोहरा ने सभी को तिलक लगाया, रक्षासूत्र बांधा और नए वस्त्र व धार्मिक ग्रंथ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
इस भावुक क्षण पर मीडिया से बात करते हुए स्थानीय विधायक भावना बोहरा काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा:
“सनातन धर्म केवल एक पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीने की एक मर्यादित शैली और हमारी पहचान है। आज हमारे 150 भाई-बहन भटककर वापस अपने मूल घर लौटे हैं। एक जनप्रतिनिधि और इस सनातन परिवार की सदस्य होने के नाते, मेरा यह परम कर्तव्य था कि मैं उनके पैर धोकर उनका स्वागत करूँ। हमारे दरवाजे उन सभी के लिए हमेशा खुले हैं जो अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं।”
कवर्धा में घटित यह घटना केवल धार्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने के लिहाज से भी एक बड़ा संदेश देती है। अक्सर धर्मांतरण के मामलों में विवाद और कड़वाहट देखने को मिलती है, लेकिन इस ‘घर वापसी’ कार्यक्रम को जिस सौहार्द, सम्मान और आत्मीयता के साथ पूरा किया गया, वह सराहनीय है।
एक महिला विधायक द्वारा पैर पखारकर जनता का अभिनंदन करना यह दर्शाता है कि सनातन धर्म में कोई छोटा या बड़ा नहीं है। यह कदम क्षेत्र में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को एक नई दिशा देगा।



