एक हंसता-खेलता परिवार, जो हफ्ता भर पहले ही तिरुपति से मुंडन करवाकर लौटा हो, अचानक रात के अंधेरे में खत्म हो जाए, तो यह सिर्फ एक पुलिस केस नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। घटनास्थल के जो सुराग सामने आए हैं, वे ‘आत्महत्या’ के सिद्धांत को चुनौती दे रहे हैं। ‘खबर नबी’ आपके लिए लेकर आया है इस खौफनाक वारदात की इनसाइड स्टोरी।
दुर्ग। मोहन नगर थाना क्षेत्र के आर्यनगर में एक ही परिवार के चार सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक गहरी रहस्यमयी गुत्थी को जन्म दे दिया है। मृतकों में पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे शामिल हैं। पुलिस प्रथम दृष्टया इसे सामूहिक आत्महत्या मान रही है, लेकिन क्राइम सीन (घटनास्थल) के हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
मृतकों की पहचान:
- गोविंद साहू (उम्र 45 वर्ष)
- चंचल साहू (उम्र 40 वर्ष – पत्नी)
- दृष्णा (उम्र 13 वर्ष – बेटी)
- शशांक (बेटा)
क्राइम सीन: जो रोंगटे खड़े कर दे
शुक्रवार की सुबह जब पुलिस आर्यनगर के इस घर में दाखिल हुई, तो मंजर बेहद भयावह था। इस घटना में कई ऐसे पेंच हैं जो इसे सामान्य आत्महत्या से अलग बनाते हैं:
- बच्चों के शव दीवान में: 13 साल की बेटी दृष्णा और बेटे शशांक के शव कमरे में रखे दीवान (बेड के बॉक्स) के अंदर से बरामद हुए।
- मुंह में ठूंसा हुआ कपड़ा: मां चंचल साहू का शव फंदे पर लटकता मिला, लेकिन उनके मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। (कोई आत्महत्या करने वाला अपने ही मुंह में कपड़ा क्यों ठूंसेगा?)
- अलग कमरे में पिता का शव: घर के मुखिया गोविंद साहू का शव दूसरे कमरे में पड़ा मिला।
खौफनाक रात के चंद घंटे पहले की कहानी
पड़ोसियों और करीबियों के बयानों ने इस मामले को और उलझा दिया है।
- तिरुपति यात्रा और खुशहाल परिवार: पड़ोसी हरभजन कौर (जो 40 सालों से साहू परिवार को जानती हैं) के मुताबिक, परिवार का कभी किसी से विवाद नहीं हुआ। महज एक हफ्ते पहले ही पूरा परिवार तिरुपति बालाजी के दर्शन कर लौटा था, जहां पति-पत्नी ने मुंडन भी कराया था।
- सामान्य था बीती रात का माहौल: पारिवारिक मित्र सुनील कोहले ने बताया कि गुरुवार रात तक सब कुछ सामान्य था। गोविंद का छोटा भाई जगन्नाथ पुरी से लौटा था और पूरे परिवार ने एक साथ बैठकर रात का खाना खाया था।
- देर रात सोडा पीते दिखे गोविंद: देर रात गोविंद को पास की एक दुकान पर सोडा पीते हुए देखा गया था। उस वक्त उनके चेहरे पर किसी गहरे तनाव के निशान नहीं थे।



