छत्तीसगढ़ में सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की सर्जिकल स्ट्राइक लगातार जारी है। इसी कड़ी में बेमेतरा जिले से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहाँ अन्नदाता को प्रताड़ित करने वाले एक ‘घूसखोर’ पटवारी को ACB ने रिश्वत लेते रंगे हाथों धर दबोचा है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
अन्नदाता की मजबूरी और घूसखोर का लालच:
यह पूरा मामला साजा ब्लॉक मुख्यालय का है। जानकारी के अनुसार, ग्राम केंद्र के निवासी एक सीधे-सादे किसान नरोत्तम अपनी जमीन से जुड़े एक जरूरी काम के लिए लंबे समय से पटवारी कार्यालय की खाक छान रहे थे। लेकिन वहां पदस्थ पटवारी ओंकार सुनवानी ने बिना ‘चढ़ावे’ के फाइल आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया। आरोपी पटवारी ने अपने ईमान का सौदा 30 हजार रुपये में तय किया। किसान की मजबूरी का फायदा उठाते हुए, पटवारी ने पहली किस्त के रूप में 15 हजार रुपये तत्काल मांगे।
एसीबी का बिछाया जाल और ‘ऑपरेशन क्लीन’:
लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रहे किसान ने हार नहीं मानी और भ्रष्टाचार से समझौता करने के बजाय सीधे ACB का दरवाज़ा खटखटाया। शिकायत मिलते ही ACB की टीम सक्रिय हुई और पूरी गोपनीयता के साथ मामले का सत्यापन (Verification) कराया।
शिकायत सही पाए जाने पर ACB ने एक अचूक जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक, जैसे ही किसान नरोत्तम ने 15 हजार रुपये की नगद रकम आरोपी पटवारी ओंकार सुनवानी के हाथों में थमाई, पहले से घात लगाए बैठी ACB की टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे रंगे हाथों दबोच लिया। रिश्वत के रुपयों के साथ रंगे हाथों पकड़े जाने पर पटवारी के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं।
कानूनी शिकंजा: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की इन धाराओं के तहत कसा फंदा
इस मामले में आरोपी पटवारी ओंकार सुनवानी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। प्रधान संपादक के तौर पर हम आपको बता दें कि आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act), 1988 (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मुख्य रूप से पटवारी पर निम्न धाराएं लगाई जा रही हैं:
- धारा 7 (Section 7 of PC Act): किसी लोक सेवक (Public Servant) द्वारा अपने पदीय कार्य के लिए वैध पारिश्रमिक के अतिरिक्त अनुचित लाभ (रिश्वत) की मांग करना या उसे स्वीकार करना।
- सजा का प्रावधान: इस धारा के तहत दोष सिद्ध होने पर आरोपी को कम से कम 3 वर्ष और अधिकतम 7 वर्ष तक के कठोर कारावास के साथ-साथ जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
कार्रवाई का असर और आगे की जांच:
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद साजा ब्लॉक कार्यालय में सन्नाटा पसर गया है और अन्य कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है। ACB की टीम ने मौके से कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी जब्त किए हैं। फिलहाल आरोपी पटवारी को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस भ्रष्टाचार के रैकेट में और कौन-कौन सफेदपोश शामिल हैं।
सरकारी दफ्तरों में बैठी यह घूसखोरी की मानसिकता प्रदेश के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है। बेमेतरा की यह कार्रवाई उन तमाम भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक खुली चेतावनी है कि अब उनकी खैर नहीं। ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) की पैनी नजर हर उस टेबल पर है, जहां से रिश्वत की फाइलें गुजरती हैं।


