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सक्ती का बहुचर्चित तांदुलडीह दोहरा हत्याकांड: अंधविश्वास की बलिवेदी पर चढ़े दो भाई, कोर्ट ने मां, भाई और दोनों बहनों को सुनाई उम्रकैद

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के तांदुलडीह में हुए दिल दहला देने वाले दोहरे हत्याकांड में करीब डेढ़ साल बाद अदालत का एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आया है। तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के चक्रव्यूह में फंसकर अपने ही दो सगे भाइयों की जान लेने वाले परिवार के चार सदस्यों को कोर्ट ने गुनहगार पाते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया है।

न्यायालय का बड़ा फैसला

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे की अदालत ने मामले की गंभीरता और ठोस गवाहों के आधार पर यह फैसला सुनाया:

  • दोषी: मृतकों की मां (फिरीतबाई सिदार), दो बहनें (अमरिका सिदारचंद्रिका सिदार) और भाई (विशाल सिदार)।
  • सजा: चारों आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास (उम्रकैद) की सजा।
  • जुर्माना: सभी दोषियों पर 1-1 हजार रुपये का अर्थदंड। जुर्माना न देने पर 6-6 महीने की अतिरिक्त कड़ी जेल काटनी होगी।
  • पैरवी: शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने अदालत में इस केस की दमदार पैरवी की।

क्या था पूरा मामला? (अक्टूबर 2024 की घटना)

यह खौफनाक वारदात बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम तांदुलडीह की है। अक्टूबर 2024 में इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था:

  • कमरे में बंद थी ‘गुप्त साधना’: मां फिरीतबाई अपने बच्चों के साथ घर के एक कमरे में उज्जैन के किसी कथित बाबा की तस्वीर रखकर पिछले 7 दिनों से भूखे-प्यासे तांत्रिक अनुष्ठान कर रही थी।
  • चीख-पुकार से खुला राज: कई दिनों तक घर से किसी के बाहर न निकलने और अंदर से लगातार चिल्लाने व अजीब आवाजें आने पर पड़ोसियों को शक हुआ।
  • कमरे का मंजर: जब दरवाजा खुलवाया गया, तो बड़ी बहन अमरिका कथित तौर पर गुरु का जाप कर रही थी, बाकी लोग अनुष्ठान में लीन थे और दो सगे भाई—विक्रम (विकास) सिदार और विक्की सिदार जमीन पर बेसुध पड़े थे (जिन्हें बाद में मृत घोषित किया गया)।
  • अंधविश्वास का चरम: पुलिस के पहुंचने के बाद भी परिवार “जय गुरुदेव” के नारे लगा रहा था। उनका दावा था कि दोनों भाई मरे नहीं हैं, बल्कि ‘सत्संग सुनने’ गए हैं और वे अपनी साधना के दम पर उन्हें फिर से जीवित कर देंगे।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: विरोध बना मौत की वजह

पुलिस, एफएसएल (FSL) और डॉक्टरों की टीम की संयुक्त जांच में जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला था:

सोची-समझी साजिश: बड़ी बहन अमरिका काफी समय पहले उज्जैन से दीक्षा लेकर आई थी, जिसके बाद पूरा परिवार इस अंधविश्वास में डूब गया। लेकिन मृत दोनों भाई इस ढोंग और तंत्र-मंत्र का लगातार विरोध करते थे और परिवार को इससे दूर रहने की सलाह देते थे। यही विरोध उनकी मौत का कारण बना।

​नाराज परिवार ने दोनों भाइयों को रास्ते से हटाने की प्लानिंग की। उन्हें ‘आखिरी बार गुरु पूजा’ के नाम पर बुलाया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई। वारदात को ‘धार्मिक अनुष्ठान’ का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन घटनास्थल से मिली कीटनाशक, जड़ी-बूटियों, डायरी और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपियों के झूठ का पर्दाफाश कर दिया और आखिरकार अदालत ने उन्हें उनके किए की सख्त सजा दे दी।

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