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छत्तीसगढ़ में ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) की तैयारी तेज़; राज्य सरकार ने गठित की हाई-प्रोफाइल समिति,

रायपुर, 25 जून 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने और इसका ड्राफ्ट (प्रारूप) तैयार करने की दिशा में एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग (मंत्रालय), महानदी भवन द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना संख्या के अनुसार, राज्य शासन ने इसके लिए एक उच्च स्तरीय 5-सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है।

इस समिति का मुख्य उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर एक समान कानून का खाका तैयार करना है।

समिति का स्वरूप और सदस्य

शासन द्वारा गठित इस महत्वपूर्ण समिति का नेतृत्व न्यायपालिका और प्रशासनिक क्षेत्र के अनुभवी दिग्गजों को सौंपा गया है। समिति के सदस्यों की सूची निम्नलिखित है:

  1. माननीय न्यायमूर्ति (से.नि.) रंजना प्रकाश देसाई — अध्यक्ष
  2. श्री शत्रुघ्न सिंह (से.नि.भा.प्र.से.) — सदस्य
  3. श्री एम.के. राउत (से.नि.भा.प्र.से.) — सदस्य
  4. श्री मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता) — सदस्य
  5. श्रीमती ज्योति रानी सिंह (से.नि.प्राचार्या) — महिला सदस्य

समिति के समक्ष तय किए गए मुख्य कार्य (Terms of Reference)

अधिसूचना के अनुसार, इस 5-सदस्यीय समिति को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता के सुचारू कार्यान्वयन के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों को संपादित करेगी:

  • विधिक स्थिति का अध्ययन: छत्तीसगढ़ राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में वर्तमान कानूनी और संवैधानिक स्थिति का गहराई से अध्ययन करना।
  • प्रमुख सामाजिक विषयों पर सुझाव: विवाह (Marriage), तलाक (Divorce), भरण-पोषण (Maintenance), उत्तराधिकार (Inheritance), दत्तक ग्रहण (Adoption) एवं इससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर समान नागरिक संहिता के दायरे में कानून बनाने के लिए ठोस सुझाव देना।
  • जनभागीदारी और विमर्श: राज्य के आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य सभी प्रमुख हितधारकों (Stakeholders) से मुलाकात कर उनके विचार और सुझाव प्राप्त करना।
  • अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन: देश के जिन अन्य राज्यों में समान नागरिक संहिता से संबंधित व्यवस्थाएं प्रचलित हैं या प्रक्रियाधीन हैं, उनके मॉडलों का विस्तृत अध्ययन करना।
  • प्रारूप (Draft) तैयार करना: सभी पक्षों के अध्ययन और सुझावों को समाहित करते हुए छत्तीसगढ़ के लिए ‘समान नागरिक संहिता’ का एक अंतिम प्रारूप (Draft) तैयार कर राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना।
  • विपुल अनुशंसाएं: कानून को लागू करने के लिए आवश्यक विधायी (Legislative) और प्रशासनिक (Administrative) सिफारिशें शासन को सौंपना।
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