सिंगरौली (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला न्यायालय परिसर में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वाली एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। सोमवार को शुरू हुआ एक मामूली विवाद बुधवार को उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब करीब 30 से 35 अज्ञात उपद्रवियों ने कोर्ट परिसर में घुसकर वकीलों के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि उन पर जानलेवा हमला भी किया। इस घटना के बाद से कोर्ट परिसर में तनाव और भय का माहौल है।
कुर्सी पर बैठने के मामूली विवाद से सुलग उठी आग
घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार को हुई थी। जानकारी के अनुसार, न्यायालय परिसर में अधिवक्ता आकेश वर्मा के चेंबर के बाहर रखी कुर्सियों पर दो युवक आकर बैठ गए थे। जब अधिवक्ता ने उन्हें वहां से हटने को कहा, तो दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि युवकों ने गाली-गलौज शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों पक्षों में हाथापाई हो गई। आरोप है कि इसके बाद कुछ वकीलों ने मिलकर एक युवक की पिटाई कर दी, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले में दोनों ही पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
बुधवार को गमछे’ में आए उपद्रवियों ने बोला धावा
सोमवार की इसी रंजिश का बदला लेने के लिए बुधवार दोपहर करीब 1:50 बजे, खुद को एक राजनीतिक संगठन का कार्यकर्ता बताने वाले 30-35 लोग गले में गमछा डाले अचानक कोर्ट परिसर में दाखिल हुए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: इन लोगों ने आते ही अधिवक्ताओं को घेर लिया, उनके साथ धक्का-मुक्की की, भद्दी-भद्दी गालियां दीं और सरेआम जान से मारने की धमकी दी। इस अचानक हुए हमले से कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस की कार्रवाई: भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बजेंद्र देव पाण्डेय की शिकायत पर बैढ़न पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की है। पुलिस ने एक राजनीतिक संगठन के पदाधिकारियों और अन्य अज्ञात हमलावरों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
दर्ज की गई धाराएं: BNS की धारा 190, 191(1), 191(2), 296(बी), 351(3) और 131।
अगली कार्रवाई: पुलिस अब कोर्ट परिसर के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, वायरल वीडियो और चश्मदीद गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
✒️ संपादकीय टिप्पणी: अब और नहीं, पूरे भारत में तुरंत लागू हो ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’
सिंगरौली कोर्ट की यह घटना कोई पहली या इकलौती घटना नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए दिन वकीलों पर हमले, कोर्ट परिसर में गोलीबारी और उन्हें डराने-धमकाने के मामले सामने आते रहते हैं।
“यदि न्याय के मंदिर के भीतर ही कानून के रखवाले और पैरवी करने वाले सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक को न्याय कैसे मिलेगा?”
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बजेंद्र देव पाण्डेय की यह चिंता बिल्कुल वाजिब है कि वकीलों की सुरक्षा दांव पर है। जब वकील बिना किसी डर के किसी पीड़ित का पक्ष नहीं रख पाएंगे, तो पूरी न्याय व्यवस्था चरमरा जाएगी।
अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारें इस विषय को गंभीरता से लें। पूरे भारत में ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ (अधिवक्ता संरक्षण कानून) को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।
इस कानून के तहत वकीलों पर हमला करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती और सख्त सजा का प्रावधान हो।
अदालतों की सुरक्षा को अभेद्य बनाया जाए ताकि कोई भी ऐरा-गैरा हथियार या लाठी-डंडे लेकर भीतर न घुस सके।
वकीलों की सुरक्षा केवल एक पेशे की सुरक्षा नहीं है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक न्याय प्रणाली को जिंदा रखने के लिए अनिवार्य है।
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